Thursday, March 5, 2020

कृष्णपक्ष/ शुक्लपक्ष

पंचांग के अनुसार हर माह में तीस दिन होते हैं और इन महीनों की गणना सूरज और चंद्रमा की गति के अनुसार की जाती है। चन्द्रमा की कलाओं के ज्यादा या कम होने के अनुसार ही महीने को दो पक्षों में बांटा गया है जिन्हे कृष्ण पक्ष या शुक्ल पक्ष कहा जाता है। पूर्णिमा से अमावस्या तक बीच के दिनों को कृष्णपक्ष कहा जाता है, वहीं इसके उलट अमावस्या से पूर्णिमा तक का समय शुक्लपक्ष कहलाता है।

 कृष्णपक्ष की शुरुआत:
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार दक्ष प्रजापति ने अपनी सत्ताईस बेटियों का विवाह चंद्रमा से कर दिया। ये सत्ताईस बेटियां सत्ताईस स्त्री नक्षत्र हैं और अभिजीत नामक एक पुरुष नक्षत्र भी है। लेकिन चंद्र केवल रोहिणी से प्यार करते थे। ऐसे में बाकी स्त्री नक्षत्रों ने अपने पिता से शिकायत की कि चंद्र उनके साथ पति का कर्तव्य नहीं निभाते। दक्ष प्रजापति के डांटने के बाद भी चंद्र ने रोहिणी का साथ नहीं छोड़ा और बाकी पत्नियों की अवहेलना करते गए। तब चंद्र पर क्रोधित होकर दक्ष प्रजापति ने उन्हें क्षय रोग का शाप दिया। क्षय रोग के कारण सोम या चंद्रमा का तेज धीरे-धीरे कम होता गया। कृष्ण पक्ष की शुरुआत यहीं से हुई।

 शुक्लपक्ष की शुरुआत:
कहते हैं कि क्षय रोग से चंद्र का अंत निकट आता गया। वे ब्रह्मा के पास गए और उनसे मदद मांगी। तब ब्रह्मा और इंद्र ने चंद्र से शिवजी की आराधना करने को कहा। शिवजी की आराधना करने के बाद शिवजी ने चंद्र को अपनी जटा में जगह दी। ऐसा करने से चंद्र का तेज फिर से लौटने लगा। इससे शुक्ल पक्ष का निर्माण हुआ। चूंकि दक्ष ‘प्रजापति’ थे। चंद्र उनके शाप से पूरी तरह से मुक्त नहीं हो सकते थे। शाप में केवल बदलाव आ सकता था। इसलिए चंद्र को बारी-बारी से कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में जाना पड़ता है। दक्ष ने कृष्ण पक्ष का निर्माण किया और शिवजी ने शुक्ल पक्ष का।



Shukla Paksha is called the rising moon in the Hindu calendar. Shukla is the Sanskrit word for white or bright. Shukla Paksha is a period of 15 days, which begins on the day of Amavasya and ends on the full moon day. This side is considered auspicious. It is considered good to do all auspicious work in the Shukla Paksha. During the Shukla Paksha, the moon becomes full at a located of 12 degrees per day, and on the full moon day the moon becomes full
Krishna Paksha starts from the full Moon (Poonam) and lasts until the new Moon (Amavasya)
Shukla paksha is the period between the New Moon (Amavasya) to the Full Moon (Poornima)

Shukla paksha as promising, and Krishna paksha as unfavourable.
According to Astrology, the period from the tenth day of Shukla paksha to the fifth day of Krishna paksha is considered as astrologically auspicious. During this time, Moon's energy is maximum or approximately maximum – which is considered pivotal in Astrology to decide auspicious and inauspicious timings.

Kundli: Planets (Grah)


किसी बच्चे के जन्म के समय अन्तरिक्ष में ग्रहों की स्थिति का एक नक्शा बनाकर रख लिया जाता है इस नक्शे केा जन्म कुण्डली कहते हैं।
ज्योतिष के मुख् दो विभाग हैं
गणित और फलित

गणित : मुख् रूप से जन् कुण्डली बनाना आता है। इसमें समय और स्थान के हिसाब से ग्रहों की स्थिति की गणना की जाती है।
 फलित विभाग:  गणनाओं के आधार पर भविष्यफल बताया जाता है।


आजकल बाज़ार में बहुत-से कम्प्यूटर सॉफ़्टवेयर उपलब् हैं और उन्हे जन् कुण्डली निर्माण और अन् गणनाओं के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
पूरी ज्‍योतिष नौ ग्रहों, बारह राशियों, सत्ताईस नक्षत्रों और बारह भावों पर टिकी हुई है। सारे भविष्‍यफल का मूल आधार इनका आपस में संयोग है। नौ ग्रह इस प्रकार हैं

ग्रह
अंग्रेजी नाम
सूर्य
Sun
चंद्र
Moon
मंगल
Mars
बुध
Mercury
गुरू
Jupiter
शुक्र
Venus
शनि
Saturn
राहु
North Node
केतु
South Node
आधुनिक खगोल विज्ञान (Astronomy) के हिसाब से सूर्य तारा और चन्‍द्रमा उपग्रह है, लेकिन भारतीय ज्‍योतिष में इन्‍हें ग्रहों में शामिल किया गया है। राहु और केतु गणितीय बिन्‍दु मात्र हैं और इन्‍हें भी भारतीय ज्‍योतिष में ग्रह का दर्जा हासिल है।

Astrology: A Science from Ancient India

Hi Everyone,

If you have reach this blog i.e. you have a little idea about Astrology. I am Astrology student. I am follower of Astrology science

i will share my understanding and learning .

Also please feel free to ask your queries. Let's help each other with ancient Science

-Seema Pandey
Astrology Believer